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सरकारी स्कूलों में हर दिन करीब 25 फीसदी शिक्षक छुट्टी पर होते हैं

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देश में इस समय बोर्ड परीक्षाओं के Results और एडमिशन का दौर चल रहा है . CBSE की बारहवीं और दसवीं कक्षा की परीक्षा के परिणाम आ चुके हैं . अच्छे नंबरों से पास होने वाले बच्चों को बधाइयां मिल रही हैं . हो सकता है कि आपके घर में भी इस बात पर चर्चा हो रही हो कि अपने बच्चे को आगे कहां पढ़ाना है . लेकिन इस सबके बीच आपने इस बात पर विचार नहीं किया होगा कि देश के उन बच्चों का Result कैसा रहा जो बिना किसी अध्यापक के पढ़े हैं . आपको जानकर हैरानी होगी देश के सरकारी स्कूलों में इस समय 10 लाख से ज़्यादा अध्यापकों की कमी है. इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा भी बहुत मुश्किल है .  हमारा सिस्टम…. शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए पिछले 70 वर्षों से संघर्ष कर रहा है लेकिन आज भी ये समस्या खत्म नहीं हुई है.

देश की इस समस्या को असम के पूर्व DGP…..मुकेश सहाय ने समझा और उन्होंने रिटायरमेंट के बाद शिक्षक बनने का फैसला किया . मुकेश सहाय 1984 बैच के IPS अधिकारी थे . 34 वर्षों तक पुलिस की नौकरी करने के बाद वो पिछले महीने 30 तारीख़ को Director General of Police के पद से रिटायर हुए हैं . अपने रिटायरमेंट के अगले ही दिन उन्होंने गुवाहटी के एक स्कूल में 12वीं कक्षा के बच्चों को गणित पढ़ाना शुरू कर दिया . इस स्कूल में पिछले दो साल से गणित का कोई टीचर नहीं था. ये बात मुकेश सहाय को पहले से पता थी इसलिए उन्होंने शिक्षक बनने का फैसला किया . IPS बनने से पहले वो M.Sc और LLB कर चुके हैं . आज उनकी ये पढ़ाई असम के बच्चों के काम आ रही है . ये तस्वीरें हमारे सिस्टम को और उन अध्यापकों को बड़े ध्यान से देखनी चाहिए जो शिक्षा को सिर्फ़ एक सरकारी काम समझते हैं .

देश के शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक हमारे देश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के 9 लाख 316 पद खाली पड़े हैं. जबकि 9वीं और 10वीं कक्षा में एक लाख 7 हज़ार 689 अध्यापकों की कमी है यानी इन स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था भगवान के भरोसे चल रही है . इसके अलावा देश के केंद्रीय विद्यालयों में अध्यापकों के 7 हज़ार से ज़्यादा पद खाली हैं और सरकारी स्कूलों में हर दिन करीब 25 फीसदी शिक्षक छुट्टी पर होते हैं

इन आंकड़ो को देखकर लगता है कि भारत के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य बहुत अंधेरे में है,,, लेकिन मुकेश सहाय जैसे लोगों को देखकर ये अहसास होता है इस अंधेरे से लड़ने वाले लोग भी भारत में मौजूद हैं . हमारे देश में IPS अधिकारी बनने के लिए सिविल सर्विस की परीक्षा पास करनी पड़ती है….जिसके लिए बहुत पढ़ाई करनी पड़ती है . यानी ये अधिकारी शिक्षा के महत्व को बहुत अच्छी तरह समझते हैं . लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में कुछ करने की ज़िम्मेदारी बहुत कम लोग ही उठा पाते हैं .

हमारे देश में सिविल सर्विस से रिटायर होने के बाद ज़्यादातर अधिकारी आराम करते हैं . अपने Holiday प्लान करते हैं या ऐसी संस्था में सलाहकार बन जाते हैं जहां उन्हें अच्छा पैसा मिलता हैं. लेकिन मुकेश सहाय ने शिक्षक बनकर इस सोच को तोड़ने का काम किया है . भारत को सुपरपॉवर बनाने के लिए काबिल लोगों की बहुत ज़रूरत हैं और ये ज़रूरत बच्चों को अच्छी शिक्षा और अच्छे संस्कार देकर ही पूरी की जा सकती है.

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