Home देश भारत एक दिन कूड़े के ढेर में दब जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

भारत एक दिन कूड़े के ढेर में दब जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

72
0
SHARE

देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को लागू नहीं किये जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि‘‘ भारत एक दिन कूड़े के ढेर में दब जाएगा.’’  शीर्ष अदालत ने कहा कि वह दिन दूर नहीं है जब दिल्ली के गाजीपुर में कचरा निपटान स्थल पर कूड़े का ढेर 73 मीटर ऊंची कुतुब मीनार की ऊंचाई के बराबर हो जाएगा और विमान को बचाने के लिये लाल बत्ती का इस्तेमाल करना होगा. न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘ हम आदेश देते रहते हैं, लेकिन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को लागू नहीं किया गया. आदेश देने का क्या फायदा है जब कोई भी इसे लागू करने को चिंतित नहीं है. भारत एक दिन कूड़े के ढेर में दब जाएगा.’’

शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ठोस अपशिष्ट के निपटारे के लिये तीन महीने में एक नीति तैयार करने को कहा. अदालत की सहायता कर रहे वकील कोलिन गोंजाल्विस ने कहा कि न्यायालय देश में सभी स्थानीय निकायों को तीन से चार महीने में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को लागू करने का निर्देश दे और अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही चलाई जा सकती है. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई के दूसरे सप्ताह में निर्धारित कर दी. पीठ देशभर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 को लागू करने से संबंधित मामले पर सुनवाई कर रही थी.

इसके पहले 6 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने देश में ठोस कचरे के प्रबंधन के बारे में आधी अधूरी जानकारी के साथ 845 पेज का हलफनामा दाखिल करने के लिए केंद्र को उसके समक्ष ‘कचरा’ नहीं डालने की चेतावनी दी और कहा कि शीर्ष अदालत ‘‘कूड़ा उठाने वाला’ नहीं है. शीर्ष अदालत ने यह सख्त टिप्पणी देश में ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अमल के मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र के वकीलों द्वारा न्यायालय में इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने की पेशकश किए जाने पर की.

क्या हुआ कोर्ट में?
न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने यह हलफनामा रिकार्ड पर लेने से इनकार करते हुए कहा कि सरकार उसके समक्ष कचरा नहीं डाल सकती है और इस तरह का हलफनामा दाखिल करने का कोई मतलब नहीं है जिसमे ‘कुछ भी नहीं’ हो. पीठ ने सख्त लहजे में केन्द्र के वकील वसीम कादरी से कहा, ‘‘आप क्या करने का प्रयास कर रहे हैं? आप हमें प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं? हम इससे प्रभावित नहीं हुए हैं. आप सब कुछ हमारे सामने डालना चाहते हैं. हम इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं.’’