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EXCLUSIVE: पापा ने कहा क्रिकेट पैशन है तो खेलो, पढ़ाई की चिंता मत करो : मयंक अग्रवाल

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घरेलू क्रिकेट में बल्ले से लगातार धूम मचा रहे कर्नाटक के युवा क्रिकेटर मयंक अग्रवाल टीम इंडिया में एंट्री के लिए मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. हालांकि, ऐसा लगता है कि उन्हें इसके लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा. वैसे खुद मयंक इसे लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं. उन्हें भरोसा है कि जब समय आएगा, उन्हें मौका जरूर मिलेगा. सचिन तेंदुलकर को देखकर क्रिकेट की शुरुआत करने वाले मयंक के बल्ले से घरेलू क्रिकेट के हर फॉर्मेट में रनों का अंबार लगा है. इस दौरान उन्होंने सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली सहित कई दिग्गज क्रिकेटरों के रिकॉर्ड भी तोड़ दिए.

मयंक अग्रवाल ने रणजी ट्रॉफी 2017-18 में 105.45 के औसत से 1160 रन ठोके, जिनमें 5 शतक शामिल रहे. मुश्ताक अली टी-20 टूर्नामेंट में 9 मैचों में 128 की स्ट्राइक रेट से 258 रन तो विजय हजारे ट्रॉफी में करीब 100 के औसत से 723 रन जड़ दिए. मयंक अग्रवाल भारतीय क्रिकेट के किसी भी ए लिस्ट के टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले इतिहास के पहले खिलाड़ी बन चुके हैं. वह भारतीय घरेलू क्रिकेट के किसी एक सीजन में 2000 या उससे अधिक रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने. इसमें 8 शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं.

भारतीय क्रिकेट के इस उभरते सितारे की सफलता को देखते हुए ने उनके सपनों, संघर्ष और लवलाइफ के बारे में चर्चा की. पेश हैं उनसे बातचीत के खास अंश:

सचिन को देखा और सोच लिया क्रिकेट ही खेलना है      
मयंक अग्रवाल ने अपने क्रिकेट की शुरुआत के बारे में बताते हुए कि सचिन तेंदुलकर को खेलते हुए देखा और सोच लिया कि मुझे भी खेलना है. उन्होंने कहा, ”जब मैं 10 साल का था, तब मेरे क्रिकेट की शुरुआत हुई. गर्मियों की छुट्टियां होती थी तब समर कैंप लगते हैं. बस उन्हीं समर कैंप में क्रिकेट खेलना शुरू किया था और वहीं से मेरी जिंदगी में क्रिकेट की शुरुआत हुई.”

 उन्होंने कहा कि मेरे क्रिकेट के प्रति लगाव की वजह सचिन तेंदुलकर हैं. मयंक ने बताया, ”मैंने सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट खेलते हुए देखा तो बहुत अच्छा लगा था. उन्हें खेलते देखकर ही मुझे लगा कि मुझे भी क्रिकेट खेलना है. तब यह नहीं जानता था कि कितना खेल पाऊंगा लेकिन यह सोच लिया था कि कोशिश जरूर करूंगा. बस ऐसे ही मेरे क्रिकेट की शुरुआत हुई. स्कूल की गर्मियों की छुट्टियों में एकेडमी में क्रिकेट सीखने जाता था और ऐसे ही खेलने लगा था.”

10वीं के बाद लिया फैसला
क्रिकेट को करियर बनाने के बारे में मयंक का कहना है,  ”मैं 10 क्लास पास कर चुका था. उस वक्त मेरी उम्र 15-16 साल के आसपास रही होगी. जब यह फैसला लेना था कि आगे मेहनत से पढ़ाई करके एकेडमिक में जाना है या क्रिकेट खेलना है. उस वक्त मैंने क्रिकेट को चुना. तब मैंने यह फैसला किया कि क्रिकेट को ही प्रोफेशन बनाना है.”

पढ़ाई की भी थी चिंता 
फैमिली सपोर्ट पर मयंक ने बताया कि उन्हें अपने क्रिकेट को लेकर फैमिली का पूरा सपोर्ट मिला है. मयंक के पिता बिजनेसमैन हैं और मां एक हाउसवाइफ हैं. मयंक बताते हैं, ”मुझे मेरे परिवार का हर कदम पर पूरा सपोर्ट मिला है. मेरे पापा ने मुझे क्रिकेट खेलने से कभी नहीं रोका. हालांकि, मेरे दिमाग में एक बार यह बात आई थी कि क्रिकेट खेलूंगा तो पढ़ाई पीछे रह जाएगी, लेकिन इस मोड़ मेरे पापा ने मुझसे कहा, पढ़ाई जरूरी है, लेकिन अगर 2-3 साल ऊपर-नीचे हो जाए तो कोई बात नहीं. क्रिकेट तुम्हारा पैशन है और तुम इसे खेलना चाहते हो तो इसे पूरी लगन और मेहनत के साथ खेलो.”

वीरेंद्र सहवाग हैं रोल मॉडल
मयंक अग्रवाल टीम इंडिया के पूर्व धाकड़ बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को अपना रोल मॉडल मानते हैं. वीरेंद्र सहवाग को गेम को डोमिनेट करने और आक्रामक खेलने के अंदाज के मयंक कायल हैं. उनका कहना है, ”वो बहुत ही सिंपल तरीके से खेलते हैं उनका वहीं अंदाज मुझे हमेशा आकर्षित करता है.”

घरेलू क्रिकेट ही ऊपर पहुंचने का बेस है
डोमेस्टिक क्रिकेट को लेकर मयंक का कहना है कि यह बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, ”घरेलू क्रिकेट से किसी भी खिलाड़ी का बेस बनता है. हाई लेवल का क्रिकेट खेलने से पहले घरेलू क्रिकेट ही खिलाड़ियों का असली ब्रेक बनता है. भारत में तो घरेलू क्रिकेट बहुत शानदार और मजबूत है, इसलिए मुझे भी लगता है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए डोमेस्टिक क्रिकेट बहुत जरूरी है. अगर कोई खिलाड़ीडोमेस्टिक क्रिकेट में अच्छा कर रहा है तो इसका नतीजा जरूर दिखाई देता है.”

सिर्फ टैलेंट देखा जाता है, फॉर्मेट नहीं 
रणजी ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शानदार परफॉर्म करने वाले मयंक अग्रवाल का कहना है कि मेरे लिए क्रिकेट के ये तीनों ही फॉर्मेट बहुत महत्वपूर्ण हैं और मैं तीनों को ही काफी एन्ज्वाय करता हूं. उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि एक खिलाड़ी होने के नाते आपको हर चैलेंज को स्वीकार करना चाहिए और उसे पॉजिटिव लेना चाहिए, क्योंकि सिर्फ अच्छे टैलेंट को देखा जाता है, किसी खास फॉर्मेट को नहीं. साथ ही मुझे लगता है कि सबसे क्रिकेट का असली फॉर्मेट बेस्ट क्रिकेट ही. आप कोई भी फॉर्मेट खेलें अगर आप बेस्ट हैं तो वहीं आपका बेस्ट क्रिकेट है.”

टीम इंडिया में एंट्री पर नो कमेंट 
टीम इंडिया में एंट्री के सवाल पर नो कमेंट कहते हुए मयंक का कहना है, ”मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि जो चीज आपको जब मिलनी है वो तब आपको मिल जाएगी. जो आपके कंट्रोल में नहीं है उसके बारे में बात करके या सोचकर क्या फायदा. आप जो कर रहे हैं वह करते रहिए और बेस्ट कीजिए. भगवान ने आपके लिए जो सोचा है वो आपको जरूर मिलेगा.”

बता दें कि पिछले काफी वक्त से टीम इंडिया में मयंक अग्रवाल की एंट्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. ऐसे में टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने कहा था, ”मैंने मयंक से बात की थी. और मैंने उनसे कहा था कि किसी भी खिलाड़ी को इस मामले में न्फ्यूज नहीं होना चाहिए कि वह कहां खड़ा है. हमारी प्रतिबद्धता है कि हम हर खिलाड़ी से बात करें चाहे उसका चयन हुआ हो या न हुआ हो. मैंने मयंक से बात की और बताया कि घरेलू क्रिकेट में उसकी परफॉर्मेंस शानदार रही है. इसलिए उसे नेशनल टीम में जल्द चुना जाएगा.”

IPL में खेलना है अचीवमेंट 
मयंक का कहना है, ”आईपीएल खिलाड़ियों के लिए एक बहुत अच्छा और जरूरी प्लेटफॉर्म है. खासकर डोमेस्टिक खिलाड़ियों के लिए काफी आईपीएल काफी मददगार है, क्योंकि हमें आईपीएल के दौरान बहुत कुछ सीखने को मिलता है. कई बड़े देसी-विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलकर, उनके साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करके काफी कुछ सीखने को मिलता है. आईपीएल को देखने के लिए हजारों-लाखों की संख्या में दर्शक आते हैं. इतने लोगों के सामने परफॉर्म करना घरेलू खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ा अचीवमेंट होता है.”

उन्होंने आगे कहा, ”आईपीएल एक बहुत बड़ा लर्निंग प्लेटफॉर्म है. यहां हम पूरी दुनिया के बेस्ट खिलाड़ियों के साथ खेलते हैं. तब आपको पता चलता है कि आप कहां खड़े हैं. इसके साथ ही इतने बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलकर आप यह भी जान पाते हैं कि आपको कहां और कैसे सुधार करना है.”

शेन वॉर्न को खेलने की तमन्ना 
मयंक अग्रवाल का कहना है कि वह अपने करियर में एक बार शेन वॉर्न को खेलने की तमन्ना रखते हैं. अगर उन्हें मौका मिलता तो वह शेन वॉर्न को जरूर खेलना चाहते. इसके साथ मयंक ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई गेंदबाज नहीं है, जिसे वह फेस नहीं करना चाहते हैं.

गर्लफ्रेंड को दिया था सरप्राइज
अपनी लवस्टोरी के बारे में मयंक ने शर्माते हुए कहा, ”मैं बहुत शर्मीला हूं और अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में ज्यादा बात नहीं करता हूं. लेकिन हां, मैंने अपनी गर्लफ्रेंड को लंदन आई में प्रपोज किया था. मयंक ने बताया कि, उनकी गर्लफ्रेंड लंदन में पढ़ाई करने गई हुई थीं. मेरे पास मौका था कुछ स्पेशल करने का. उन्हें सरप्राइज करने का और इस तरह मैंने उन्हें प्रपोज किया.”

 हर खिलाड़ी होता है खास 
टीम इंडिया में बेस्ट बैट्समैन के सवाल पर मयंक का कहना है कि मुझे लगता है कि टीम में हर खिलाड़ी का रोल अलग होता है और उतना ही महत्वपूर्ण भी होता है. मैंने किसी भी खिलाड़ी की तुलना और उन्हें नंबर देने में यकीन नहीं करता हूं. मुझे लगता है हर खिलाड़ी की अपनी महत्ता है.