Home खेल क्यों बेहतरीन खिलाड़ी साबित हुआ दक्षिण अफ्रीका दौरे पर यह भारतीय खिलाड़ी

क्यों बेहतरीन खिलाड़ी साबित हुआ दक्षिण अफ्रीका दौरे पर यह भारतीय खिलाड़ी

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टीम इंडिया का दक्षिण अफ्रीका दौरा खत्म हो गया है. दौरे का समापन टीम इंडिया ने टी20 सीरीज का आखिरी मैच जीत, 2-1 से सीरीज अपने नाम कर किया. पहले दो टेस्ट में करारी हार के बाद टीम इंडिया को जिस तरह से आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था उसके बाद जिस अंदाज में टीम ने वापसी की वह काबिले तारीफ रहा. टेस्ट सीरीज के तीसरे टेस्ट में जीत कर पहले तो विराट कोहली ने अपनी टीम में जबर्दस्त उत्साह का संचार किया. इस जीत के बावजूद टीम इंडिया टेस्ट सीरीज तो 2-1 से हार गई लेकिन अंतिम टेस्ट जीतकर आईसीसी रैंकिंग में टीम अपना पहला स्थान बरकरार रखने में कामयाब हो सकी.

इसके बाद टीम को आगे से लीड कर शानदार बल्लेबाजी करते हुए. जिस तरह से वनडे सीरीज में विराट ने 5-1 जीत दिलाई उसकी सभी ने एक सुर से उनकी जमकर तारीफ की जिसके कि वे हकदार थे. इसके बाद टी20 सीरीज भी 2-1 से जीतना टीम इंडिया के लिए काफी खास रहा. अंतिम वनडे में आखिरी ओवर तक रोमांच कायम रहा लेकिन टीम इंडिया ने जुझारू जज्बा दिखाते हुए मैच जीत कर न केवल टी20 सीरीज 2-1 से अपने नाम की बल्कि इस तीन सीरीज के दक्षिण अफ्रीकी दौरे को भी 2-1 से जीत लिया.

बेशक इस दौरे में विराट कोहली ने शानदार कप्तानी के साथ शानदार बल्लेबाजी की. वनडे सीरीज में तो हर मैच के बाद कई रिकॉर्ड्स अपने नाम किए. लेकिन इस पूरे दौरे में सबसे शानदार प्रदर्शन राह भारत के तेज गेंदबाजी भुवनेश्वर कुमार का. भुवी ने तीनों ही सीरीज में लगातार शानदार गेंदबाजी की. विशेषज्ञों ने यहां तक कह दिया कि अगर भुवनेश्वर कुमार को दूसरे टेस्ट से हटाया नहीं जाता तो वह टेस्ट मैच भी भारत जीत जाता.

पहले टेस्ट में बढ़िया प्रदर्शन के बावजूद बाहर हुए
जब भुवी को दूसरे टेस्ट में बाहर का रास्ता दिखाया गया तो  उनके फैंस का गुस्सा फूट पड़ा, क्योंकि पहले मैच में वही अकेले खिलाड़ी थे, जिन्होंने अपनी रफ्तार से अफ्रीका को चौंका दिया. पहली ही पारी में उन्होंने 4 विकेट लेकर अफ्रीका की कमर तोड़ दी. उसके बाद जब बल्लेबाजी की बारी आई तो टीम इंडिया ने जब 92 रनों पर 7 विकेट गंवा दिए. तब उन्होंने हार्दिक पांड्या के साथ मिलकर 99 रनों की साझेदारी की. और टीम को मुसीबत से निकाला. यही साझेदारी भारत की सबसे बडी़ साझेदारी बनी.

दूसरी पारी में उन्होंने फिर से अच्छी गेंदबाजी करते हुए 2 विकेट लिए और नाबाद 13 रन बनाए.  लेकिन टीम मैच हार गई. जब दूसरे मैच में टीम उतरी तो उसमें से भुवी गायब थे. इसके बाद टीम मैनेजमेंट की खूब आलोचना की गई.

तीसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने गलती सुधारी और भुवी वापस आए. दोनों पारियों को मिलाकर उन्होंने 4 विकेट लिए. लेकिन जिस समय टीम को उनके बल्ले की जरूरत थी. उस समय उन्होंने पहली पारी में 49 बॉल में 30 रन बनाए. वहीं दूसरी पारी में 76 बॉल में 33 रन बना दिए. दोनों पारियों को मिलाकर उन्होंने 63 रन बनाए. अगर हम ध्यान दें तो टीम को तीसरे टेस्ट में 63 रनों से ही मात दी. तीसरे टेस्ट मैच में उन्हें उनके प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच का खिताब मिला.

वहीं वनडे सीरीज में भी भुवी ने अपनी गेंदबाजी से खासा प्रभाव छोड़ा जबकि सीरीज में सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय रिस्ट स्पिनर्स की होती रही. छह मैचों की वनडे सीरीज में भुवनेश्वर कुमार में  हालांकि विकेट तो केवल दो ही लिए लेकिन उन्होंने इकोनॉमी के मामले में कप्तान का निराश नहीं किया. पूरी सीरीज में उनकी इकोनॉमी 6.09 रही. डेथ ओवर में भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी कर दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को कभी हावी होने नहीं दिया.

टी20 में 5 विकेट लेने का कारनामा
लेकिन भुवी ने अपना कमाल पहले ही टी20 मैच में दिखाया. इस मैच में उन्होंने करियर की सबसे शानदार गेंदबाजी की  जिसके दम पर टीम इंडिया ने इस मैच में दक्षिण अफ्रीका को 28 रनों से हरा दिया. इस मैच में भुवनेश्वर कुमार ने 24 रन देकर 5 विकेट हासिल किए. उनका आखिरी ओवर दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे घातक साबित हुआ. इस ओवर में कुल 4 विकेट गिरे.

भुवी के इस ओवर में 3 विकेट तो लगातार बॉल पर गिरे. इनमें तीसरा विकेट रन आउट हुआ. इस तरह भुवी इस मैच में हैट्रिक लेने से चूक गए. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने इस मैच में एक नए रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. भुवनेश्वर टीम इंडिया पहले तेज गेंदबाज बन गए, जिन्होंने टी20 में 5 विकेट लेने का कारनामा कर दिखाया है. दूसरे टी20 में भुवी ने तीन ओवर में 19 रन दिए, जिसमें भारत यह मैच हार गया था.

लेकिन भुवनेश्वर  ने तीसरे टी20 में अपना कुछ अलग रंग दिखाया. मैच के अंतिम ओवर में दक्षिण अफ्रीका को छह गेंदों में 19 रन की जरूरत थी जो कि मेजबान टीम के लिए नामुमकिन नहीं लग रहा था. लेकिन बीसवें ओवर की पहली गेंद पर चौका खाने के बाद भी भुवी ने अपना धैर्य बनाए रखते हुए शानदार गेंदाबजी की और भारत को 7 रन से जीत दिला दी.  सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए भुवी को मैन ऑफ द सीरीज का खिताब दिया गया.

कम मिलते हैं आज इतने विनम्र खिलाड़ी
बतौर खिलाड़ी बात की जाए तो भुवनेश्वर कुमार काफी शालीन या डेसेंट क्रिकेटर माने जाते हैं. शांत, स्थिर, बिना किसी टैटू के. यही वजह है कि उनके साथ ‘गुड ब्वॉय’ की टैग जुड़ गया है. मेरठ के इस विनम्र खिलाड़ी को कई बार उनकी विनम्रता के लिए ही अनदेखा भी कर दिया गया है. वह अपनी उपस्थिति को मैदान पर लगातार साबित करते रहे हैं. 2012 में डेब्यू के बाद से भुवनेश्वर का नाम लगातार ऊंचाइयां छूता रहा है. भुवनेश्वर कुमार ने भारतीय तेज गेंदबाजी को नया आयाम दिया है. वह शुरुआती स्पेल में शानदार आगाज करते हैं और डेथ ओवरों में रनगति पर ब्रेक लगाने में कामयाब होते हैं