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नीरव, माल्या जैसे उद्योपतियों के कारण डूबता आम इंसान, हर व्यक्ति पर 4 हजार का कर्ज!

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बिजनेस का विस्तार करने के बहाने लोन लेने और फिर विदेश फरार हो जाने वाले भारतीय कारोबारियों जैसे नीरव मोदी और विजय माल्या के कारण देश के बैंकों की हालात दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है. बैंक सरकार के सामने इन डिफ्लटर्स को देश वापस लाने के लिए सिर्फ गुहार लगा रही है, पर वर्तमान में जो बैंकों के हालात है उसका नुकसान देश की आम जनता को हो रहा है. लोन डिफ्लॉर्ट्स के कारण सितंबर 2017 तक भारतीय बैंकों ने नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) या डूबत खातों ने 8.29 लाख करोड़ का आंकड़ा पार लिया है.

हर शख्स पर 6 हजार रुपये का अतिरिक्त भार
दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के मुताबिक 8.29 लाख करोड़ रुपये कर्ज की वो रकम है, जिसके वापस मिलने की संभावना शून्य के बराबर है. जितना पैसा बैंकों का डूबा है अगर उसकी भरपाई आम जनता से कराई जाती है तो देश के हर नागरिक को लगभग 6,233 रुपये चुकाने होंगे. वर्ष 2017 के रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय उद्योगों पर 28.92 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. हैरान करने वाली बात यह है कि यह कर्ज पूरे कर्ज का महज 37 प्रतिशत ही है.