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डे-नाइट टेस्ट पर COA के रवैये पर बीसीसीआई की कड़ी प्रतिक्रिया

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वेस्टइंडीज के खिलाफ अक्टूबर में प्रस्तावित डे-नाइट टेस्ट मैच के आयोजन पर मुख्य कोच रवि शास्त्री से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद इस मसले पर प्रशासकों की समिति (सीओए) के रवैये पर बीसीसीआई ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. सीओए प्रमुख विनोद राय के इस मामले में उन्हें अंधेरे में रखने के कारण यह प्रस्तावित मैच विवाद का विषय बन गया है. बीसीसीआई कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी, सीईओ राहुल जोहरी और महाप्रबंधक (क्रिकेट) सबा करीम इस मैच को लेकर शास्त्री के संपर्क में थे.

शास्त्री ने बोर्ड से कहा कि किसी दूसरी श्रेणी की टीम (वेस्टइंडीज) के खिलाफ इस मैच की मेजबानी किसी छोटे शहर में करना अच्छा होगा जिसमें एक सत्र दूधिया रोशनी में खेला जाए. राय ने इस मामले पर सीओए को नजरअंदाज करने पर नाराजगी जताई. जब इस बारे में बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने मिश्रित प्रतिक्रिया दी. अधिकारी ने कहा, ‘‘राय जब नीतिगत फैसलों पर प्रक्रिया की बात करते हैं तो वह सही हैं. निश्चित तौर पर (कार्यवाहक अध्यक्ष) सीके खन्ना और (कोषाध्यक्ष) अनिरुद्ध चौधरी को भी संज्ञान में लिया जाना चाहिए था जैसा कि अमिताभ और राहुल ने नहीं किया.”

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन राय ने भी कई अवसरों पर कार्यवाहक अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को संज्ञान में नहीं लिया. अचानक अब उन्हें लगता है कि खन्ना और अनिरुद्ध को जानकारी नहीं दी गई.

2015 में खेला गया था पहला डे-नाइट टेस्ट
पहला डे-नाइट टेस्ट मैच 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था. अब तक गुलाबी गेंद से खेले ऐसे नौ मैच हुए है. बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने पहले कहा था कि 2016 में भारतीय टीम न्यूजीलैंड के साथ घरेलू मैदान पर दिन रात्रि टेस्ट मैच खेलेगी लेकिन यह नहीं हो सका. पिछले साल एडिलेड ओवल में दो से छह दिसंबर के बीच आयोजित किया गया. यह एशेज सीरीज का पहला दिन-रात का टेस्ट मैच था. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेम्स सदरलैंड ने कहा, ‘हमने ऐडिलेड में दो दिन-रात के टेस्ट मैच खेले हैं. हमें इन मैचों पर दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली हैं. अभी हाल में जिंबाब्वे और दक्षिण अफ्रीका टीम के बीच 4 दिन का एक टेस्ट मैच खेला गया था. ये टेस्ट मैच भी डे नाइट था. हालांकि इसमें जिंबाब्वे को बहुत बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा.