Home दुनिया बुजुर्गों से भरने वाली है दुनिया, 140 साल तक जीवित रहेंगे लोग

बुजुर्गों से भरने वाली है दुनिया, 140 साल तक जीवित रहेंगे लोग

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चिकित्सा क्षेत्र में हो रही प्रगति के चलते आने वाले वर्ष में लोग डिजिटल प्रौद्योगिकी पर आधारित कृत्रिम ज्ञान का प्रयोग कर अपने स्वास्थ्य का खुद प्रबंध करते हुए 140 वर्ष की आयु तक जीवित रह सकेंगे. यहां विश्व आर्थिक मंच की शिखर बैठक में स्वास्य प्रौद्योगिकी पर केंद्रित एक परिचर्चा में विशेषज्ञों के अनुसार प्रौद्योगिकी के इस उभरते परिदृश्य में अस्पतालों की भूमिका केवल आपात चिकित्सा कक्ष की रह जाएगी. माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यपालक सत्य नडेला ने कहा कि डिजटल प्रौद्योगिकी आधारित चौथी औद्योगिक क्रांति चिकित्सा क्षेत्र को इस कदर बदल देगी कि कृत्रिम ज्ञान की प्रौद्योगिक और डाटा से लैस चिकित्सा वैज्ञानिक तत्काल रोग के सर्वोत्तम निदान ढूंढने में बड़े बड़े दिग्ग्जों को पीछे छोड़ देंगे.

अस्पतालों का प्रबंध भी डिजिल प्रौद्योगिक पर आधारित हो जाएगा. मेडिकल रिकार्ड तुरंत के तुरंत उपलब्ध हो सकेंगे.

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इस सत्र के बारे में जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रौद्योगिकी और औषधियों के तालमेल से दुनिया स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर हो रही है. विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘ कुछ ही दशकों में लोग 140 वर्ष तक जी सकेंगे. अस्पताल आपात चिकित्सा कक्ष भर रह जाएंगे क्योंकि लोग अपनी बीमारी का प्रबंध खुद करने लगेंगे. मालूम हो कि भारत सरकार लोगों की औसतन उम्र 58-60 मानती है. भारत में सरकारी नौकरियों में लोगों के रिटायरमेंट की भी उम्र यही मानी जाती है.

ज़िम्बाब्वे में सबसे कम औसत उम्र
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पुरानी रिपोर्ट में कहा गया था कि ज़िम्बाब्वे में लोगों की औसत उम्र दुनिया भर के किसी भी देश में सबसे कम है और वहाँ पुरुष या महिलाएँ औसतन 40 साल से ज़्यादा नहीं जी पाते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार ज़िम्बाब्वे में महिलाओं की औसत उम्र 34 साल है और पुरुष 37 साल से ज़्यादा नहीं जी पाते हैं. संगठन के अनुसार ज़िम्बाब्वे में महिलाओं की औसत उम्र पिछले एक साल में दो साल कम हो गई है और यह उम्र किसी भी देश में महिलाओं की औसत उम्र से सबसे कम है. इतना ही नहीं, ज़िम्बाब्वे में एचआईवी – एड्स वायरस से संक्रमण का ख़तरा भी पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं को ही ज़्यादा है.